तेरे उतारे हुए दिन ...

---------------------------------------------------------
Film - Das Kahaniyaan (2007)
Poetry - Gulzar
Recital - Nana Patekar
---------------------------------------------------------


तेरे उतारे हुए दिन
टंगे हैं lawn में अब तक
न वो पुराने हुए हैं
न उन का रंग उतरा…
कहीं से कोई भी सीवन अभी नहीं उधड़ी
इलाइची के बहुत पास रखे पत्थर पर
ज़रा सी जल्दी सरक आया करती है छाँव
ज़रा सा और घना हो गया है वो पौधा
मैं थोड़ा थोड़ा वो गमला हटाता रहता हूँ
फकीरा अब भी वहीं मेरी coffee देता है
गिलेरिओं को बुला कर खिलाता हूँ biscuit
गिलेरियाँ मुझे शक की नज़र से देखती हैं
वो तेरे हाथों का मस जानती होंगी….
कभी कभी जब उतरती है chill शाम की छत से
थकी थकी सी ज़रा देर lawn में रुक कर
सफेद और गुलाबी मुसुन्ढ़े के पौधों में घुलने लगती है
के जैसे बर्फ का टुकरा पिघलता जाये whisky में
मैं scarf दिन का गले से उतार देता हूँ
तेरे उतारे हुए दिन पहन के अब भी मैं
तेरी महक में कई रोज़ काट देता हूँ

तेरे उतारे हुए दिन
टंगे हैं lawn में अब तक
वो पुराने हुए हैं
उन का रंग उतरा
कहीं से कोई भी सीवन अभी नहीं उधड़ी

2 comments:

Abhishek said...

thank you!

Vijay Kumar Sappatti said...

shukriya dost aapke is blog ka , mujhe bahut khushi hui hai .. lekin ise kaise follow kare ya mujh tak iski latest update kaise aayengi , ye samjh nahi aa raha hai .

mera email hai - vksappatti@gmail.com

thanks a lot

Post a Comment

Disclaimer

This blog contains only streams to songs hosted by third party websites. None of the songs are uploaded by us and we do not have liability for the content of such third party websites. If you believe that any of such streams infringes your copyright, kindly leave a comment below the post.

Read A Lyrics Diary in Roman(Eng)

Recent Comments

Visitors

Free Counters Free Counters